Sunday, 10 September 2017






नहीं कोई मंझिल थी मेरी फिर भी तेरा दर पा गया 
न थी मेरी आस्था इतनी फिर भी तुझे ढूंढ लिया 
मेरे कदमों ने खुद ही तय किया की तू ही मेरी मंज़िल है !
....यह मैंने नहीं किया !
यह कृपा तेरी ही है की मेरा सर तेरे सामने झुक गया है !


Sunday, 3 September 2017




तेरा कुछ भी नहीं सब कुछ है 
मेरा कुछ भी नहीं इक तू ही है 


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Sunday, 11 June 2017










तेरा मेरा क्या रिश्ता?
जो तू है , मैं वही हूँ 
तेरा मेरा यह रिश्ता!





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गुरुदेव की तस्वीर एक सत्संग प्रेमी की है!





Wednesday, 8 February 2017




जिसके भाग्य में तेरा दर लिखा है
उसे कहाँ फिर कहीं जाना है 







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Monday, 13 June 2016

                                                         



 ऐ खुदा , तेरी रहमत बड़ी की तू बड़ा है 
                                                          नहीं जानता मैं ,
                                                          बस इतना समझ लिया है की
                                                          तू मेरे साथ खड़ा है !   






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Friday, 3 June 2016


रिझाना 

क्या खूब शब्द है रिझाना ! प्रेमी प्रेमिका को रिझाना चाहता है ! चकोर चाँद को रिझाना चाहता है ! शिष्य अपने गुरु को रिझाना चाहता है !  क्या करें ?  प्रेम का आलम ही कुछ ऐसा है !

आमिर खुशरो अपने मुर्शिद निजम्मुद्दीन औलिाया के दरबार की झूठी प्लेटें चाटना ही अपनी खुशकिस्मती समझते हैं !

हज़रात निजामुद्दीन औलिया  और आमिर खुशरो 

जलाल-उद्दिन  रूमी अपने गुरु शम्स तबरेज़ से इतनी मुहब्बत करता है कि वह उनमें और अपने में 
फरक ही नहीं कर सकता !


                                                                     जलाल - उद्दीन  रूमी 

बुल्ले शाह 
जब गुरु हज़रात शाह इनायत खान, बुल्ले शाह से किसी बात पे बहुत ही गुस्सा हो गए और अपना मुंह तक नहीं दिखाने को कहा, तो अपने रूठे हुए गुरु शाह इनायत खान क़ादरी का वियोग बुल्ले शाह नहीं सह सके ! कोई उन्हें सलाह देता है की तुम्हारे गुरु को नाच गाना बहुत ही पसंद है ! तो अपने गुरु को रिझाने के लिए बुल्ले शाह नाच सीखते हैं और अपने आप को नाचने वाली औरतों की टोली में छुपाते  हुए गुरु दरबार पहुँच जाते हैं ! डर के मारे वह दूर से नाचते हैं , गुरु के पास नहीं आते ! पर गुरु बुल्ले शाह को पहचान ही लेते हैं ! बुल्ले शाह की बेसब्री, प्रेम , वियोग और नाच ने उनके क्रोधित गुरु का दिल आखिर पिघला ही दिया !  

पर हमें कहाँ ऐसे अहोभाग्य की प्राप्ति है ? हमारा मन तो बड़ा बेईमान है ! दिल भी खोटा रखते हैं ! हम अपने गुरुदेव को रिजाने  के लिए जो सच्चा मन चाइये, वह कहाँ से लाएं ? 



गुरुदेव स्वामी राजेन्द्रजी महाराज 

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गुरु चरणों में !

अन्य फोटो क्रेडिट्स : गूगल से  फ्री  इमेजेज !

गुरुदेव स्वामी राजेन्द्रजी महाराज : अमृतवाणी के एक प्रेमी की कृपा से !





Wednesday, 18 May 2016





The long line of scriptures, sages, and seers
All proclaim the Truth.
But sometimes it takes a whole lifetime,
To open one's eyes to That!

We come into this world of physical science and matter, 
Where we measure happenings through our pitiful standards,
Little knowing that it takes but a plunge,
Into deep waters, to reach the other shore.

All along the route the signs point the way
Sometimes tripping you up,
Sometimes pushing you along.

And sometimes appears a saint, 
Who kindly give you His hand.
And you trot after Him,
Stumbling and prancing like a child.
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